सुशासन सरकार में प्राथमिक शिक्षक का खुली पोल चंपारण जिला के रामनगर प्रखंड के पंचायत राज भावल के पलीया गाँव मे ग्रामीणों ने उठाया प्रथमिक शिक्षा पर उठाया सवाल उजागर हुआ स्कूल के प्रधान शिक्षक राज 3 वर्षों से बच्चों के पोशाक राशी एवं छात्रवृत्ति के पैसे गबन करने का लगा आरोप।

सरस् संगम अखबार टीम की रिपोर्ट- आज हमारे बिहार में नौनिहालों का भविष्य खतरे में दिखाई दे रहा है। जो हमारे समाज और देश के लिए खतरे का सूचक साबित हो रहा है। सरस् संगम अखबार की टीम बिहार के पश्चिमी चंपारण जिला के रामनगर प्रखंड के पंचायत राज भावल के पलिया गाँव के राजकीय प्रथमिक विद्यालय फुलवरिया पलीया पहुंच कर विधालय का जायजा लिया। राजकीय प्राथमिक फुलवरिया पलिया विद्यालय के प्रधान शिक्षक ऑफिस से बाहर कुर्सी लगाकर आराम फरमा रहे थे।और मोबाइल हैंडसेट लेकर चला रहे थे। उस स्कूल के बच्चे शोर गुल करते दिखाई दे रहे थे ।जब उन्होंने मीडिया को देखा तो तुरंत मोबाइल पॉकेट में रख कर बच्चों को शांत कराने लगे। उच्च विद्यालय के प्रधान शिक्षक का नाम जयनंदन राम था। सरस संगम अखबार की टीम जैसे ही प्रधान शिक्षक के ऑफिस में गई तो उस स्कूल के ऑफिस में सबसे ज्यादा गंदगी पाई गईं। जिसमें मध्यान्ह भोजन का चावल रखा हुआ था । और रूम बहुत ज्यादा बदबू दे रहा था । और मध्यान्ह भोजन बनाने का चावल उसी ऑफिस के अंबार में रखा गया था। ग्रामीणों के द्वारा बोला गया कि ऑफिस में रखी चावल चावल से रसोईया खाना बनाकर छात्रों को खिलाती है। अगर किसी भी प्रकार की घटना -घट जाती हैं।तो उसका जिम्मेवार उस स्कूल के प्रधान शिक्षक के ऊपर सौपा एवं शिक्षा विभाग के ऊपर होगा। ग्रामीणों एवं बच्चों के द्वारा बताया गया ।कि उस स्कूल के प्रधान शिक्षक के द्वारा 3 वर्षों से छात्रों की छात्रवृत्ति एवं पोशाक की राशि छात्रों- छात्रओ को नही दिया है। ग्रमीणों के द्वारा प्रधान शिक्षक पर आरोप लगाया गया कि हमारे बच्चों का पूरा पैसा गबन कर लिए हैं जब ग्रामीणों के द्वारा उपयुक्त बात पर प्रधान शिक्षक से चर्चा किया गया तो उन्होंने मीडिया के सामने खुलकर नहीं बोला और कहा कि उसकी राशि विभाग द्वारा अभी जारी नहीं किया गया है । जो अपने आप मे एक चर्चा का विषय बना हुआ है ।उनकी बातों से लग रहा था। वह केवल मीडिया से बचने के लिए असत्य -असत्य बोले जा रहे थे।जबकि सरकार हर साल पोशाक और छात्रवृत्ति की राशि स्कूलों में वितरित करती है ।ग्रामीणों के द्वारा उस प्रधान शिक्षक पर बच्चों के साथ दूरव्यवहार एवं पैसा गबन करने के मामले में गंभीर आरोप लगाये जा रहे थे ।जो अपने आप समाज के लोगों का चर्चा का विषय बना हुआ है। सुशासन सरकार में प्रथमिक शिक्षा की स्तर बहुत गिर चुकी है। ऐसे माना जाता हैं।कि प्रथमिक शिक्षा गरीब बच्चों का रीढ़ है। और उज्ज्वल भविष्य को सकार करता है। इसे सुशासन सरकार में शिक्षा की बागडोर ऐसे शिक्षक को दी जाती है। जो शिक्षक अंग्रेजी में एक मीडिया अखबार का नाम तक नहीं लिख पाते। ऐसे प्रधान गुरुजी बच्चे को क्या शिक्षा देगें। सुशासन सरकार में प्रथमिक शिक्षा स्थिति पोल खोल कर रख दिया है । सरस संगम अखबार की टीम के जिला कोआडीनेटर पिन्टू कुमार द्वारा पहली कक्षा एवं दूसरी कक्षा का जायजा लिया गया तो सबसे पहले बोर्ड पर 21-07-2018 तक पढ़ाई हुई थीं। उक्त वर्ग के एक छात्रा से पूछा गया भारत के प्रधान मंत्री का क्या नाम है। तो उस छात्रा द्वारा उतर दिया गया कि नीतीश कुमार हेड सर् बताये हैं। 5वी वर्ग का भी यही हाल रहा। 17 तक का पहाड़ा याद नहीं था उसके बाद उस छात्रा ने बताया कि यह सब हमारी स्कूल में GK और पहाड़ा नहीं पढ़ाया जाता है। वहाँ के ग्रमीणों ने पढ़ाई एवं लिखाई एवं पोशाक राशि एवं मध्याह्न भोजन के मामले में ग्रामीणों एवं बच्चों के द्वारा मीडिया से शिकायत की।

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