सरस संगम बगहा 
नंदन गढ़ के बौद्ध स्तूपों के सुरक्षा के लिए सरकार ने घेराबन्दी करनी शुरू की


बगहा, 07 मई (हि.स.)। बिहार के पश्चिम चंपारण के लौरिया स्थित नंदनगढ़ बौद्ध स्तूप को राष्ट्रीय मानचित्र पर लाने के लिए केन्द्र सरकार ने कवायद शुरू कर दी है | बीते इतिहास को साक्षी भाव में खड़ा होकर बताने वाले इस नंदन गढ़ के आस पास के स्तूपों के अस्तित्व और सुरक्षा के लिए सरकार ने यहाँ कार्य आरंभ कर दिया है | चार करोड़ रुपया खर्च करके यहाँ मौजूद 108 स्तूपों में चार की चहरदीवारी करा रही है। चहरदीवारी की ऊँचाई पलींथ से 18 मीटर बन रही है। स्तूप की घेराबंदी का काम टेली कम्यूनिकेशन ऑफ इंडिया ने लिया है | टेली कम्यूनिकेशन अपने सब कंटेक्टर सिसमेटिक एडवांस पारा लिमिटेड के माध्यम से लौरिया के आठ स्तूप के टीलों की घेराबंदी का काम करा रही है। इसकी पुष्टि करते हुए सिसमेटिक एडवांस के जेई मेहंदी हसन ने बताया कि घेराबंदी का काम जारी है,जो जून तक पूरा हो जायेगा | जानकारी हो कि इन बौद्ध स्तूपों पर ग्रामीणों के माल-मवेशी का चारागाह स्थल बना हुआ है |

इतिहासकार डाॅ० राधाकृष्ण चौधरी के अनुसार नंदवंश के समय इसका नाम लौहित्यनगर हुआ करता था। नंदन गढ़ मगध राज्य के नंद वंश के राजाओं का विश्राम स्थल था, वहीं चाणक्य ने अर्थशास्त्र की रचना के लिए एकांतवास भी यहीं किया था | अपने शासनकाल के दौरान अशोक बौद्ध धर्म प्रचार के लिए जब कपिलवस्तु, लुम्बिनी की यात्रा पर थे तब यहीं ठहरे थे | बाद में उन्होंने इसी स्थान को बौद्ध स्तूप के तौर पर निर्मित करवाया | इस निर्माण का एक और कारण था. भगवान बुद्ध जब बुद्धत्व की प्राप्ति के दौरान कुशीनगर जा रहे थे, तब उनका पड़ाव इसी गढ़ पर हुआ था | इसलिए सम्राट अशोक ने इस स्थान को भगवान बुद्ध का पवित्र स्थल मानकर बौद्ध स्तूप का निर्माण कर दिया | नंदन गढ़ और आसपास के मौजूद बौद्ध स्तूप टीले आज भी मगध के नंद वंश की कहानी बताते हैं | साथ ही बुद्ध के अवतार को स्तूप में विराजमान होकर उनके भगवान होने का प्रमाण देता है |

पर्यटन के दृष्टिकोण से पूरे भारतवर्ष में यह स्थान अद्वितीय है | बिहार और केंद्र सरकार के ध्यान देने से यह जगह राष्ट्रीय पर्यटन के मानचित्र पर आ सकता है | वहीं बिहार और भारत सरकार को पर्यटन क्षेत्र में आर्थिक तौर पर फायदा पहुंचेगा |नंदनगढ़ के विषय में लोगों का मानना है कि मगध के राजा अजातशत्रु ने वैशाली से जीता था | यहां घनानंद वंश का शासन भी रहा था | नंद वंश के राजा अपने साम्राज्य निरीक्षण और आखेट के लिए अक्सर यहां पर रुकते थे | इसलिए उसका नाम नंदनग़ढ पड़ गया | 321 ईसापूर्व चंद्रगुप्त मौर्य शासनकाल में चाणक्य भी अक्सर यहीं अपना समय गुजारा करते थे | कहा जाता है कि उन्होंने यहीं पर अर्थशास्त्र की रचना की थी | यह भी कहा जाता है कि चाणक्य तंत्र विद्या के विषय में भी निपुण थे और नंदनगढ़ और चानकीगढ़ पर रात्रि में दीपक जलाकर तांत्रिक साधना किया करते थे | नंदन गढ़ से महज पच्चीस किलोमीटर की दूरी पर चानकीगढ़ चाणक्य की कहानी को दोहरा रहा है | यह स्थान नंदन गढ़ से मिलता जुलता है | इन्हीं दोनों स्थानों पर चाणक्य समय बिताते थे | ईसा पूर्व 273 में अशोक ने गद्दी संभाली | कलिंग युद्व के बाद वह धर्म यात्रा पर निकल पड़ा | रूमिनदेई अभिलेख और दिव्यावदान से ज्ञात होता है कि अशोक ने धर्म प्रसार के लिए धर्म यात्राएं की थीं | इस यात्रा में लुम्बिनी, कुशीनगर, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, सारनाथ और बोधगया आदि स्थान शामिल थे |इसकी पुष्टि इतिहासकार विंसेंट स्मिथ भी करते हैं | अनुश्रुतियों से स्पष्ट होता है कि अशोक ने पहले आठ स्तूपों में बुद्ध के भस्मावशेषों को संग्रहित किया था | बाद में भस्मावशेषों को वितरित करके अन्य स्तूपों में रखा | इसी क्रम में वह कुशीनगर और कपिलवस्तु की यात्रा के दौरान अशोक को जब ज्ञात हुआ कि नंदन गढ़ स्थल पर भगवान बुद्ध ठहर चुके हैं, तो इस जगह को पवित्र मानते हुए इसने इस स्थल को बौद्ध स्तूप में निर्माण करा दिया | यह स्तूप 24.38 मीटर उंचा है | आकार में बहुकोणीय है तथा पांच वेदिकाओं में निर्मित है, जिसपर तीन परिक्रमा पथ हैं | मुख्य स्थान से इसकी लंबाई 31.69 मीटर है | सन 1880 में अंग्रेजी साम्राज्य में सर ऐलेक्जेंडर कनिंघम ने खुदाई करके इसका पता लगाया था | सन 1935 और 1936 में एन मजूमदार ने इसकी क्रमबद्व खुदाई करवाई, जो 1941 तक जारी रही |

आज़ादी के सत्तर साल गुज़रने के बाद बिहार और केंद्र सरकार ने इसके महत्व को समझा है |यहां के राजनीतिज्ञों की तरफ से भी कोई क़दम नहीं उठाए गए | यही वजह है कि आज तक इसे राष्ट्रीय पर्यटन के क्षितिज पर नहीं जोड़ा जा सका है |

No comments:

Post a Comment

SARAS SANGAM,

पुलिस को मिली बड़ी सफलता, एक पिस्टल ,दो मैगजीन ,तीन गोली के साथ अपराधी गिरफ्तार

सरस् संगम(कार्यलय )बेतिया से ब्यूरो सोनुभारत द्वाज की रिपोर्ट:- बेतिया काली बाग ओपी थाना क्षेत्र के बौद्धि माई स्थान के पास अज्ञात अपराधि...

SARAS SANGAM