दो सगे भाइयों के बीच बफादारी की फिल्में खूब देखी होंगी मगर हकीकत देखना हो तो मुलायम-शिवपाल के किस्से अजर अमर है जब जी चाहना देख ओर सुन लेना। जहाँ एक भाई अखाड़े में खड़ा ताल ठोक रहा था । वही दूसरी ओर छोटा भाई साइकिल के हैंडल को थामे खड़ा भाई का हौसला बढ़ा रहा था,
खेत ,खलिहान,गली, गलियारों में साइकिल पर सवार बड़ा भाई छोटा पीछे केरियल पर बैठकर भाई के ही नाम के नारे लगता हुआ मानो गांवों व कस्बों के गरीब- मजदूर, लाचार -असहाय को ये संदेश सुना रहे थे। कि अब तुम्हारा नेता पैदा हो गया है जो तुम्हारे लिए लड़े ओर मरेगा.....तुम्हारे लिए हर सम्भव प्रयास करके इस देश की भृष्ट सरकारों से तुम्हें न्याय दिलवाएगा। ये सुनकर लोगों के चेहरे पर मुस्कान आयी और नेता जी को कंधे पर बिठाकर गरीब किसान के बेटे को अपना नेता अपना मसीहा अपना हमदर्द चुन लिया। तभी न जाने कितनों की निगाहों में नेता जी खटक गए और उनको निशाना बना लिया......आखिर कैसे कोई उनका कुछ बिगाड़ पाता जिसके पास शिवपाल नाम का छोटा भाई भी हो...........वो भाई जिसने नेता जी को पिता कि तरह पूजा और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर हालत में बुरे से बुरे पलों में बड़ी ही हिम्मत और साहस के साथ नेता जी को बड़ी से बड़ी विवादित मंचो से भाषण करवा दिए। जब नेता जी विधानसभा ओर लोकसभा में विपक्षियों पर गरज रहे थे उस वक्त उनका छोटा भाई शिवपाल उनकी दी हुई जिम्मेदारियों का निर्वाहन करते हुए चिलचिलाती हुई धूप में खून पसीना बहाकर पार्टी को मजबूत कर रहे थे। जो मुलायम ने कहाँ वो शिवपाल ने मान लिया वो प्यार वो मोह्हबत शायद कभी राजनीतिक जगत में दोवारा देखने को मिले।दोनों भाईयों की मेहनत संघर्ष और लगन ने पार्टी आज एक देश व दुनिया की राजनीतिक पार्टी में एक विशेष सम्मान और अदब का स्थान दिलाया है। मुझे गौरव मेहसूस होता है कि मैं उस पार्टी उस विचारधारा उस समाजवादी उन दो भाइयों के द्वारा खून पसीने से सींची पार्टी का एक मामूली सा हिस्सा हूँ । इतना ही कहूँगा वरना इनके लिए जो भी लिखों वो कम है।।
*अजीत कुमार इंडियन*
दुनिया की राजनीति में पहला ऐसा जोड़ा है ।जो दो सगे भाइयों का जिन्होंने राजनीति जगत में एक अलग ही अपना सिक्का जमा रखा है।
सरस् संगम(कार्यलय)उतर प्रदेश गोरखपुर,संतकबीरनगर
अजीत कुमार इंडियन की रिपोर्ट-
दो सगे भाइयों के बीच बफादारी की फिल्में खूब देखी होंगी मगर हकीकत देखना हो तो मुलायम-शिवपाल के किस्से अजर अमर है जब जी चाहना देख ओर सुन लेना। जहाँ एक भाई अखाड़े में खड़ा ताल ठोक रहा था । वही दूसरी ओर छोटा भाई साइकिल के हैंडल को थामे खड़ा भाई का हौसला बढ़ा रहा था,
खेत ,खलिहान,गली, गलियारों में साइकिल पर सवार बड़ा भाई छोटा पीछे केरियल पर बैठकर भाई के ही नाम के नारे लगता हुआ मानो गांवों व कस्बों के गरीब- मजदूर, लाचार -असहाय को ये संदेश सुना रहे थे। कि अब तुम्हारा नेता पैदा हो गया है जो तुम्हारे लिए लड़े ओर मरेगा.....तुम्हारे लिए हर सम्भव प्रयास करके इस देश की भृष्ट सरकारों से तुम्हें न्याय दिलवाएगा। ये सुनकर लोगों के चेहरे पर मुस्कान आयी और नेता जी को कंधे पर बिठाकर गरीब किसान के बेटे को अपना नेता अपना मसीहा अपना हमदर्द चुन लिया। तभी न जाने कितनों की निगाहों में नेता जी खटक गए और उनको निशाना बना लिया......आखिर कैसे कोई उनका कुछ बिगाड़ पाता जिसके पास शिवपाल नाम का छोटा भाई भी हो...........वो भाई जिसने नेता जी को पिता कि तरह पूजा और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर हालत में बुरे से बुरे पलों में बड़ी ही हिम्मत और साहस के साथ नेता जी को बड़ी से बड़ी विवादित मंचो से भाषण करवा दिए। जब नेता जी विधानसभा ओर लोकसभा में विपक्षियों पर गरज रहे थे उस वक्त उनका छोटा भाई शिवपाल उनकी दी हुई जिम्मेदारियों का निर्वाहन करते हुए चिलचिलाती हुई धूप में खून पसीना बहाकर पार्टी को मजबूत कर रहे थे। जो मुलायम ने कहाँ वो शिवपाल ने मान लिया वो प्यार वो मोह्हबत शायद कभी राजनीतिक जगत में दोवारा देखने को मिले।दोनों भाईयों की मेहनत संघर्ष और लगन ने पार्टी आज एक देश व दुनिया की राजनीतिक पार्टी में एक विशेष सम्मान और अदब का स्थान दिलाया है। मुझे गौरव मेहसूस होता है कि मैं उस पार्टी उस विचारधारा उस समाजवादी उन दो भाइयों के द्वारा खून पसीने से सींची पार्टी का एक मामूली सा हिस्सा हूँ । इतना ही कहूँगा वरना इनके लिए जो भी लिखों वो कम है।।
*अजीत कुमार इंडियन*
दो सगे भाइयों के बीच बफादारी की फिल्में खूब देखी होंगी मगर हकीकत देखना हो तो मुलायम-शिवपाल के किस्से अजर अमर है जब जी चाहना देख ओर सुन लेना। जहाँ एक भाई अखाड़े में खड़ा ताल ठोक रहा था । वही दूसरी ओर छोटा भाई साइकिल के हैंडल को थामे खड़ा भाई का हौसला बढ़ा रहा था,
खेत ,खलिहान,गली, गलियारों में साइकिल पर सवार बड़ा भाई छोटा पीछे केरियल पर बैठकर भाई के ही नाम के नारे लगता हुआ मानो गांवों व कस्बों के गरीब- मजदूर, लाचार -असहाय को ये संदेश सुना रहे थे। कि अब तुम्हारा नेता पैदा हो गया है जो तुम्हारे लिए लड़े ओर मरेगा.....तुम्हारे लिए हर सम्भव प्रयास करके इस देश की भृष्ट सरकारों से तुम्हें न्याय दिलवाएगा। ये सुनकर लोगों के चेहरे पर मुस्कान आयी और नेता जी को कंधे पर बिठाकर गरीब किसान के बेटे को अपना नेता अपना मसीहा अपना हमदर्द चुन लिया। तभी न जाने कितनों की निगाहों में नेता जी खटक गए और उनको निशाना बना लिया......आखिर कैसे कोई उनका कुछ बिगाड़ पाता जिसके पास शिवपाल नाम का छोटा भाई भी हो...........वो भाई जिसने नेता जी को पिता कि तरह पूजा और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर हालत में बुरे से बुरे पलों में बड़ी ही हिम्मत और साहस के साथ नेता जी को बड़ी से बड़ी विवादित मंचो से भाषण करवा दिए। जब नेता जी विधानसभा ओर लोकसभा में विपक्षियों पर गरज रहे थे उस वक्त उनका छोटा भाई शिवपाल उनकी दी हुई जिम्मेदारियों का निर्वाहन करते हुए चिलचिलाती हुई धूप में खून पसीना बहाकर पार्टी को मजबूत कर रहे थे। जो मुलायम ने कहाँ वो शिवपाल ने मान लिया वो प्यार वो मोह्हबत शायद कभी राजनीतिक जगत में दोवारा देखने को मिले।दोनों भाईयों की मेहनत संघर्ष और लगन ने पार्टी आज एक देश व दुनिया की राजनीतिक पार्टी में एक विशेष सम्मान और अदब का स्थान दिलाया है। मुझे गौरव मेहसूस होता है कि मैं उस पार्टी उस विचारधारा उस समाजवादी उन दो भाइयों के द्वारा खून पसीने से सींची पार्टी का एक मामूली सा हिस्सा हूँ । इतना ही कहूँगा वरना इनके लिए जो भी लिखों वो कम है।।
*अजीत कुमार इंडियन*
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