दिल्ली -स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने गुरुवार सुबह एक बयान जारी कर कहा है । कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत नाज़ुक बनी हुई है ।और उनके तबियत में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
सुबह 11 बजे के क़रीब एम्स ने मेडिकल बुलेटिन जारी कर उनकी तबीयत को अभी भी चिंताजनक बताया।एम्स ने अपने बयान में कहा, "पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत अभी भी नाज़ुक है और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है.। इमेज कॉपीरइटAIIMS
बुधवार देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अटल बिहारी वाजपेयी को देखने के लिए एम्स गए थे। उसके बाद से लगातार एक-एक कर कई बड़े नेता एम्स पहुंच रहे हैं.वाजपेयी बीते 9 हफ्तों से एम्स में भर्ती हैं. वे 93 वर्ष के हैं.इमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES
आपको ये भी रोचक लगेगा
आँखों देखी: पटना के शेल्टर होम के भीतर का डरावना सच
शवों के साथ एकांत का शौक रखने वाला यह तानाशाह
आम आदमी पार्टी में बार-बार इस्तीफ़े क्यों होते हैं?
वो 26 सेकंड और केरल में छा गए बिहार के कन्हैया
उन्हें इसी वर्ष जून में किडनी में संक्रमण और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से एम्स में भर्ती कराया गया था.भाजपा के संस्थापकों में शामिल अटल तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे हैं.
उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है.
सांसद से प्रधानमंत्री तक
इमेज कॉपीरइटGETTY IMAGESअटल बिहारी वाजपेयी नौ बार लोकसभा के लिए चुने गए. वे दूसरी लोकसभा से तेरहवीं लोकसभा तक सांसद रहे.
बीच में कुछ लोकसभाओं से उनकी अनुपस्थिति रही. ख़ासतौर से वर्ष 1984 में जब वो ग्वालियर में कांग्रेस के माधवराव सिंधिया के हाथों पराजित हुए थे.वे वर्ष 1962 से 1967 और 1986 में राज्यसभा के सदस्य भी रहे. 16 मई 1996 को अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार प्रधानमंत्री बने.लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई 1996 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा. इसके बाद वर्ष 1998 तक लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे.वर्ष 1998 के आमचुनावों में सहयोगी पार्टियों के साथ उन्होंने लोकसभा में अपने गठबंधन का बहुमत साबित किया और इस तरह एक बार फिर प्रधानमंत्री बने.लेकिन एआईएडीएमके द्वारा गठबंधन से समर्थन वापस लेने के बाद उनकी सरकार गिर गई और एक बार फिर आम चुनाव हुए.।वर्ष 1999 में हुए चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साझा घोषणापत्र पर लड़े गए और इन चुनावों में वाजपेयी के नेतृत्व को एक प्रमुख मुद्दा बनाया गया था।तब गठबंधन को बहुमत हासिल हुआ और वाजपेयी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली थी।एक दशक से अटल बिहारी वाजपेयी का एकांतवास वाजपेयी ने जब नेहरू की तस्वीर मंगवाई।
पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई की हालत नाजुक एम्स में भर्ती।
सरस् संगम (कार्यलय)दिल्ली
दिल्ली -स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने गुरुवार सुबह एक बयान जारी कर कहा है । कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत नाज़ुक बनी हुई है ।और उनके तबियत में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
सुबह 11 बजे के क़रीब एम्स ने मेडिकल बुलेटिन जारी कर उनकी तबीयत को अभी भी चिंताजनक बताया।एम्स ने अपने बयान में कहा, "पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत अभी भी नाज़ुक है और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है.। इमेज कॉपीरइटAIIMS
बुधवार देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अटल बिहारी वाजपेयी को देखने के लिए एम्स गए थे। उसके बाद से लगातार एक-एक कर कई बड़े नेता एम्स पहुंच रहे हैं.वाजपेयी बीते 9 हफ्तों से एम्स में भर्ती हैं. वे 93 वर्ष के हैं.इमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES
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आँखों देखी: पटना के शेल्टर होम के भीतर का डरावना सच
शवों के साथ एकांत का शौक रखने वाला यह तानाशाह
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वो 26 सेकंड और केरल में छा गए बिहार के कन्हैया
उन्हें इसी वर्ष जून में किडनी में संक्रमण और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से एम्स में भर्ती कराया गया था.भाजपा के संस्थापकों में शामिल अटल तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे हैं.
उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है.
सांसद से प्रधानमंत्री तक
इमेज कॉपीरइटGETTY IMAGESअटल बिहारी वाजपेयी नौ बार लोकसभा के लिए चुने गए. वे दूसरी लोकसभा से तेरहवीं लोकसभा तक सांसद रहे.
बीच में कुछ लोकसभाओं से उनकी अनुपस्थिति रही. ख़ासतौर से वर्ष 1984 में जब वो ग्वालियर में कांग्रेस के माधवराव सिंधिया के हाथों पराजित हुए थे.वे वर्ष 1962 से 1967 और 1986 में राज्यसभा के सदस्य भी रहे. 16 मई 1996 को अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार प्रधानमंत्री बने.लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई 1996 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा. इसके बाद वर्ष 1998 तक लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे.वर्ष 1998 के आमचुनावों में सहयोगी पार्टियों के साथ उन्होंने लोकसभा में अपने गठबंधन का बहुमत साबित किया और इस तरह एक बार फिर प्रधानमंत्री बने.लेकिन एआईएडीएमके द्वारा गठबंधन से समर्थन वापस लेने के बाद उनकी सरकार गिर गई और एक बार फिर आम चुनाव हुए.।वर्ष 1999 में हुए चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साझा घोषणापत्र पर लड़े गए और इन चुनावों में वाजपेयी के नेतृत्व को एक प्रमुख मुद्दा बनाया गया था।तब गठबंधन को बहुमत हासिल हुआ और वाजपेयी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली थी।एक दशक से अटल बिहारी वाजपेयी का एकांतवास वाजपेयी ने जब नेहरू की तस्वीर मंगवाई।
दिल्ली -स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने गुरुवार सुबह एक बयान जारी कर कहा है । कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत नाज़ुक बनी हुई है ।और उनके तबियत में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
सुबह 11 बजे के क़रीब एम्स ने मेडिकल बुलेटिन जारी कर उनकी तबीयत को अभी भी चिंताजनक बताया।एम्स ने अपने बयान में कहा, "पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत अभी भी नाज़ुक है और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है.। इमेज कॉपीरइटAIIMS
बुधवार देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अटल बिहारी वाजपेयी को देखने के लिए एम्स गए थे। उसके बाद से लगातार एक-एक कर कई बड़े नेता एम्स पहुंच रहे हैं.वाजपेयी बीते 9 हफ्तों से एम्स में भर्ती हैं. वे 93 वर्ष के हैं.इमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES
आपको ये भी रोचक लगेगा
आँखों देखी: पटना के शेल्टर होम के भीतर का डरावना सच
शवों के साथ एकांत का शौक रखने वाला यह तानाशाह
आम आदमी पार्टी में बार-बार इस्तीफ़े क्यों होते हैं?
वो 26 सेकंड और केरल में छा गए बिहार के कन्हैया
उन्हें इसी वर्ष जून में किडनी में संक्रमण और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से एम्स में भर्ती कराया गया था.भाजपा के संस्थापकों में शामिल अटल तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे हैं.
उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है.
सांसद से प्रधानमंत्री तक
इमेज कॉपीरइटGETTY IMAGESअटल बिहारी वाजपेयी नौ बार लोकसभा के लिए चुने गए. वे दूसरी लोकसभा से तेरहवीं लोकसभा तक सांसद रहे.
बीच में कुछ लोकसभाओं से उनकी अनुपस्थिति रही. ख़ासतौर से वर्ष 1984 में जब वो ग्वालियर में कांग्रेस के माधवराव सिंधिया के हाथों पराजित हुए थे.वे वर्ष 1962 से 1967 और 1986 में राज्यसभा के सदस्य भी रहे. 16 मई 1996 को अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार प्रधानमंत्री बने.लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई 1996 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा. इसके बाद वर्ष 1998 तक लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे.वर्ष 1998 के आमचुनावों में सहयोगी पार्टियों के साथ उन्होंने लोकसभा में अपने गठबंधन का बहुमत साबित किया और इस तरह एक बार फिर प्रधानमंत्री बने.लेकिन एआईएडीएमके द्वारा गठबंधन से समर्थन वापस लेने के बाद उनकी सरकार गिर गई और एक बार फिर आम चुनाव हुए.।वर्ष 1999 में हुए चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साझा घोषणापत्र पर लड़े गए और इन चुनावों में वाजपेयी के नेतृत्व को एक प्रमुख मुद्दा बनाया गया था।तब गठबंधन को बहुमत हासिल हुआ और वाजपेयी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली थी।एक दशक से अटल बिहारी वाजपेयी का एकांतवास वाजपेयी ने जब नेहरू की तस्वीर मंगवाई।
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G pranam very good mai aapke lambe umr ki kamna karte hai
ReplyDeleteG pranam very good mai aapke lambe umr ki kamna karte hai
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