पिन्टू कुमार की रिपोर्ट-
आज जो हमें इस दुनिया के भौतिक व अलौकिक शक्तियों से परिचय कराता है। वह आज पूरे संसार मे विख्यात है। पहले जन्म तो माँ बाप देते हैं ।पर हमें ज्ञान की मार्ग के अथाह सागर तक में गुरु पँहुचाते हैं ।और उसमें कैसे तैरने एवं सीखने की ललक होती हैं। आज हम डूबते उतराते गुरु के मार्गदर्शन में जीवन को सही दिशा में खेवनहार बन जाते हैं। मां बाप से हमें संस्कार का शिक्षा मिलता है । तो समाज से संस्कृति की ज्ञान प्राप्त होती है ।तो गुरु से अक्षर का ज्ञान मिलता है।
आज 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में हमलोग मनाते है। मतलब सर्वपल्ली डाॅ० राधाकृष्णन जी का जन्मदिवस को ही शिक्षक दिवस के रुप में मनाते हैं। कारण कि एक शिक्षक का जीवन बहुत ही सधारण पर अनुकरणीय और पूजनीय होता है। वो किसी लालसा में नहीं रहता। परन्तु बिना किसी लालसा को पाले अपने जीवन के पाठ को दुनिया के सामने रखते हुए एक शिक्षक से राष्ट्रपति बनना एक शिक्षक के लिए गौरव की बात है। और यही गौरव भारत जैसे महान देश को प्राप्त हुआ था ।डाॅ राधाकृष्णन ने। जो समस्त शिक्षकों के लिए सम्मान की बात है।
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को नमन, गुरु दुनिया का सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति।
सरस् संगम(कार्यलय)बगहा/चौतरवा
पिन्टू कुमार की रिपोर्ट-
आज जो हमें इस दुनिया के भौतिक व अलौकिक शक्तियों से परिचय कराता है। वह आज पूरे संसार मे विख्यात है। पहले जन्म तो माँ बाप देते हैं ।पर हमें ज्ञान की मार्ग के अथाह सागर तक में गुरु पँहुचाते हैं ।और उसमें कैसे तैरने एवं सीखने की ललक होती हैं। आज हम डूबते उतराते गुरु के मार्गदर्शन में जीवन को सही दिशा में खेवनहार बन जाते हैं। मां बाप से हमें संस्कार का शिक्षा मिलता है । तो समाज से संस्कृति की ज्ञान प्राप्त होती है ।तो गुरु से अक्षर का ज्ञान मिलता है।
आज 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में हमलोग मनाते है। मतलब सर्वपल्ली डाॅ० राधाकृष्णन जी का जन्मदिवस को ही शिक्षक दिवस के रुप में मनाते हैं। कारण कि एक शिक्षक का जीवन बहुत ही सधारण पर अनुकरणीय और पूजनीय होता है। वो किसी लालसा में नहीं रहता। परन्तु बिना किसी लालसा को पाले अपने जीवन के पाठ को दुनिया के सामने रखते हुए एक शिक्षक से राष्ट्रपति बनना एक शिक्षक के लिए गौरव की बात है। और यही गौरव भारत जैसे महान देश को प्राप्त हुआ था ।डाॅ राधाकृष्णन ने। जो समस्त शिक्षकों के लिए सम्मान की बात है।
पिन्टू कुमार की रिपोर्ट-
आज जो हमें इस दुनिया के भौतिक व अलौकिक शक्तियों से परिचय कराता है। वह आज पूरे संसार मे विख्यात है। पहले जन्म तो माँ बाप देते हैं ।पर हमें ज्ञान की मार्ग के अथाह सागर तक में गुरु पँहुचाते हैं ।और उसमें कैसे तैरने एवं सीखने की ललक होती हैं। आज हम डूबते उतराते गुरु के मार्गदर्शन में जीवन को सही दिशा में खेवनहार बन जाते हैं। मां बाप से हमें संस्कार का शिक्षा मिलता है । तो समाज से संस्कृति की ज्ञान प्राप्त होती है ।तो गुरु से अक्षर का ज्ञान मिलता है।
आज 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में हमलोग मनाते है। मतलब सर्वपल्ली डाॅ० राधाकृष्णन जी का जन्मदिवस को ही शिक्षक दिवस के रुप में मनाते हैं। कारण कि एक शिक्षक का जीवन बहुत ही सधारण पर अनुकरणीय और पूजनीय होता है। वो किसी लालसा में नहीं रहता। परन्तु बिना किसी लालसा को पाले अपने जीवन के पाठ को दुनिया के सामने रखते हुए एक शिक्षक से राष्ट्रपति बनना एक शिक्षक के लिए गौरव की बात है। और यही गौरव भारत जैसे महान देश को प्राप्त हुआ था ।डाॅ राधाकृष्णन ने। जो समस्त शिक्षकों के लिए सम्मान की बात है।
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