बिहार सरकार बिहार में शिक्षकों का शोषण और प्रताड़ित कर रही है उक्त बातें शिक्षक नेता अनुदान नहीं वेतनमान फॉर्म के प्रांतीय संयोजक प्रोफेसर परवेज आलम ने अपने प्रेस विज्ञप्ति में बताया है श्री आलम ने उदाहरण स्वरुप शिक्षा विभाग द्वारा आनन फानन में मार्च महीना में इंटरमीडिट और माध्यमिक का मूल्यांकन कार्य समाप्त कराया जो शिक्षक मूल्यांकन कार्य में भाग नहीं ले सके उन पर f.i.r. तक कराया गया 10 मार्च को मूल्यांकन कार्य समाप्त हो गया परंतु आज तक शिक्षकों का मूल्यांकन कार्य की राशि उनके खातों में नहीं आया जबकि रिजल्ट भी हो गया 11th का एग्जाम भी शुरू है रजिस्ट्रेशन का तिथि भी निकल चुका है सारा काम बोर्ड द्वारा इन शिक्षकों से लिया जा रहा है परंतु इनके मूल्यांकन कार्य की राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है जबकि पूर्व में मूल्यांकन कार्य जिस दिन समाप्त होती थी उसी दिन मूल्यांकन केंद्र पर शिक्षकों को चेक द्वारा भुगतान कर दिया जाता था परंतु इस नई व्यवस्था में सरकार ने शिक्षकों खास्कर वित्त रहित शिक्षकों के साथ काफी अन्य कर रही है आज सरकार के नीति के कारण वित्त रहित शिक्षक बरसों से वित्त रहित का डंक झेल रहे हैं 7 वर्ष का अनुदान बाकी है त्योहार सर पर परंतु इनका सूझबूझ लेने वाला कोई नहीं है सरकार इनसे हर सरकारी काम करा रही है यहां तक इन वित्त रहित शिक्षकों का सहयोग निर्वाचन कार्य में भी लिया गया है परंतु उनका नहीं घाटा अनुदान सरकार दे रही है ना उन्हें समान काम के बदले समान वेतन मान दे रही है जो अनुदान बाकी है उसे भी नहीं दे पा रही है या बिहार सरकार शिक्षा के क्षेत्र में विफलता ओं की ओर बढ़ती जा रही है जग जाहिर है कि आज बिहार में 60% छात्रों का शिक्षा इन्हीं वित्तीय संस्थानों से प्राप्त होता है अगर यह वित्तीय संस्थान नहीं होते तो बिहार में मध्यम और गरीब वर्ग के छात्र शिक्षा से वंचित रह जाते शिक्षा क्षेत्र में इतना सहयोग करने वाले वित्त रहित शिक्षकों की दशा दिन पर दिन खराब होती जा रही है मैं बिहार सरकार और बिहार विद्यालय समिति के अध्यक्ष से मांग करता हूं 1 सप्ताह के अंदर सभी शिक्षकों के जिन्होंने मूल्यांकन कार्य किया है उनके मूल्यांकन कार्य की राशि अगला मोड़ के खातों में डाली जाए अन्यथा इसका परिणाम बहुत बुरा होगा सारे महाविद्यालयों में नामांकन और पंजीयन पर रोक लगाने हेतु हम सभी पूरे बिहार के वित्त रहित कर्मी संगठित होकर इस कार्य को बाधित कर देंगे
सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया से ब्यूरो रिपोर्ट:-
बिहार सरकार बिहार में शिक्षकों का शोषण और प्रताड़ित कर रही है उक्त बातें शिक्षक नेता अनुदान नहीं वेतनमान फॉर्म के प्रांतीय संयोजक प्रोफेसर परवेज आलम ने अपने प्रेस विज्ञप्ति में बताया है श्री आलम ने उदाहरण स्वरुप शिक्षा विभाग द्वारा आनन फानन में मार्च महीना में इंटरमीडिट और माध्यमिक का मूल्यांकन कार्य समाप्त कराया जो शिक्षक मूल्यांकन कार्य में भाग नहीं ले सके उन पर f.i.r. तक कराया गया 10 मार्च को मूल्यांकन कार्य समाप्त हो गया परंतु आज तक शिक्षकों का मूल्यांकन कार्य की राशि उनके खातों में नहीं आया जबकि रिजल्ट भी हो गया 11th का एग्जाम भी शुरू है रजिस्ट्रेशन का तिथि भी निकल चुका है सारा काम बोर्ड द्वारा इन शिक्षकों से लिया जा रहा है परंतु इनके मूल्यांकन कार्य की राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है जबकि पूर्व में मूल्यांकन कार्य जिस दिन समाप्त होती थी उसी दिन मूल्यांकन केंद्र पर शिक्षकों को चेक द्वारा भुगतान कर दिया जाता था परंतु इस नई व्यवस्था में सरकार ने शिक्षकों खास्कर वित्त रहित शिक्षकों के साथ काफी अन्य कर रही है आज सरकार के नीति के कारण वित्त रहित शिक्षक बरसों से वित्त रहित का डंक झेल रहे हैं 7 वर्ष का अनुदान बाकी है त्योहार सर पर परंतु इनका सूझबूझ लेने वाला कोई नहीं है सरकार इनसे हर सरकारी काम करा रही है यहां तक इन वित्त रहित शिक्षकों का सहयोग निर्वाचन कार्य में भी लिया गया है परंतु उनका नहीं घाटा अनुदान सरकार दे रही है ना उन्हें समान काम के बदले समान वेतन मान दे रही है जो अनुदान बाकी है उसे भी नहीं दे पा रही है या बिहार सरकार शिक्षा के क्षेत्र में विफलता ओं की ओर बढ़ती जा रही है जग जाहिर है कि आज बिहार में 60% छात्रों का शिक्षा इन्हीं वित्तीय संस्थानों से प्राप्त होता है अगर यह वित्तीय संस्थान नहीं होते तो बिहार में मध्यम और गरीब वर्ग के छात्र शिक्षा से वंचित रह जाते शिक्षा क्षेत्र में इतना सहयोग करने वाले वित्त रहित शिक्षकों की दशा दिन पर दिन खराब होती जा रही है मैं बिहार सरकार और बिहार विद्यालय समिति के अध्यक्ष से मांग करता हूं 1 सप्ताह के अंदर सभी शिक्षकों के जिन्होंने मूल्यांकन कार्य किया है उनके मूल्यांकन कार्य की राशि अगला मोड़ के खातों में डाली जाए अन्यथा इसका परिणाम बहुत बुरा होगा सारे महाविद्यालयों में नामांकन और पंजीयन पर रोक लगाने हेतु हम सभी पूरे बिहार के वित्त रहित कर्मी संगठित होकर इस कार्य को बाधित कर देंगे
बिहार सरकार बिहार में शिक्षकों का शोषण और प्रताड़ित कर रही है उक्त बातें शिक्षक नेता अनुदान नहीं वेतनमान फॉर्म के प्रांतीय संयोजक प्रोफेसर परवेज आलम ने अपने प्रेस विज्ञप्ति में बताया है श्री आलम ने उदाहरण स्वरुप शिक्षा विभाग द्वारा आनन फानन में मार्च महीना में इंटरमीडिट और माध्यमिक का मूल्यांकन कार्य समाप्त कराया जो शिक्षक मूल्यांकन कार्य में भाग नहीं ले सके उन पर f.i.r. तक कराया गया 10 मार्च को मूल्यांकन कार्य समाप्त हो गया परंतु आज तक शिक्षकों का मूल्यांकन कार्य की राशि उनके खातों में नहीं आया जबकि रिजल्ट भी हो गया 11th का एग्जाम भी शुरू है रजिस्ट्रेशन का तिथि भी निकल चुका है सारा काम बोर्ड द्वारा इन शिक्षकों से लिया जा रहा है परंतु इनके मूल्यांकन कार्य की राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है जबकि पूर्व में मूल्यांकन कार्य जिस दिन समाप्त होती थी उसी दिन मूल्यांकन केंद्र पर शिक्षकों को चेक द्वारा भुगतान कर दिया जाता था परंतु इस नई व्यवस्था में सरकार ने शिक्षकों खास्कर वित्त रहित शिक्षकों के साथ काफी अन्य कर रही है आज सरकार के नीति के कारण वित्त रहित शिक्षक बरसों से वित्त रहित का डंक झेल रहे हैं 7 वर्ष का अनुदान बाकी है त्योहार सर पर परंतु इनका सूझबूझ लेने वाला कोई नहीं है सरकार इनसे हर सरकारी काम करा रही है यहां तक इन वित्त रहित शिक्षकों का सहयोग निर्वाचन कार्य में भी लिया गया है परंतु उनका नहीं घाटा अनुदान सरकार दे रही है ना उन्हें समान काम के बदले समान वेतन मान दे रही है जो अनुदान बाकी है उसे भी नहीं दे पा रही है या बिहार सरकार शिक्षा के क्षेत्र में विफलता ओं की ओर बढ़ती जा रही है जग जाहिर है कि आज बिहार में 60% छात्रों का शिक्षा इन्हीं वित्तीय संस्थानों से प्राप्त होता है अगर यह वित्तीय संस्थान नहीं होते तो बिहार में मध्यम और गरीब वर्ग के छात्र शिक्षा से वंचित रह जाते शिक्षा क्षेत्र में इतना सहयोग करने वाले वित्त रहित शिक्षकों की दशा दिन पर दिन खराब होती जा रही है मैं बिहार सरकार और बिहार विद्यालय समिति के अध्यक्ष से मांग करता हूं 1 सप्ताह के अंदर सभी शिक्षकों के जिन्होंने मूल्यांकन कार्य किया है उनके मूल्यांकन कार्य की राशि अगला मोड़ के खातों में डाली जाए अन्यथा इसका परिणाम बहुत बुरा होगा सारे महाविद्यालयों में नामांकन और पंजीयन पर रोक लगाने हेतु हम सभी पूरे बिहार के वित्त रहित कर्मी संगठित होकर इस कार्य को बाधित कर देंगे
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