बिहार टीईटी सीटीईटी उत्तीर्ण शिक्षक बहाली मोर्चा की बैठक गुरूवार को एम जे के कॉलेज परिसर मे प्रदेश सहसंयोजक सोनू कुमार सोनी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में उपस्थित अभ्यर्थियों नें सरकार पर शिक्षा विरोधी नीति का आरोप लगाते हुये कहा कि राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों के 02 लाख से अधिक पद वर्षों से रिक्त पड़े है। इधर टीईटी की परीक्षा उत्तीर्ण होने के बावजूद शिक्षक बहाली का इंतजार कर रहे है। कुछ अभ्यर्थियों के उम्र सीमा भी समाप्ति के कगार पर हैं। एक तरफ सरकार राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की दावा करती है। वहीं दूसरी तरफ 50 हजार की संख्या में टीईटी उत्तीर्ण प्रशिक्षित अभ्यर्थी दर-बदर भटक रहे है। फिर भी टालमटोल का सिलसिला अभी भी जारी है। पहले सरकार नियोजित शिक्षकों के सुप्रीम कोर्ट में चल रहे वेतन मामले का हवाला देकर बहाना करती रही, अब शिक्षकों के समानुपातीकरण के बाद बहाली करने की बात कही जा रही है। ऐसे में देखा जायें तो सरकार की मंशा साफ नहीं है समानुपातीकरण के आड़ में बहाली को बेवजह लटकाना चाह रही है।
उन्होंने बताया कि 01 जून 2019 को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक थी। उसमें निर्णय लिये गये कि हाईस्कूलों में जून माह से 32,000 हजार शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया प्रारंभ होगी, जिसमें एसटीईटी अभ्यर्थी पर्याप्त संख्या में मिल नहीं रहें है। वहीं प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों का समानुपातीकरण करने के बाद शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया प्रारंभ होने की बात की जा रही हेै जहाँ हजारों टीईटी अभ्यर्थी बेरोजगार पड़े है। इस तरह दोहरी नीति की वजह से सभी अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित एवं परेशान है। समान काम-समान वेतन का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने का हवाला देकर शिक्षामंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं अन्य द्वारा डेढ़ साल से आश्वासन दिया जा रहा कि फैसला आने के 10 दिन के भीतर बहाली प्रक्रिया प्रारंभ हो जायेगी, जो की आ चुका है। अब शिक्षकों के समानुपातीकरण के नाम पर बहाली में अनावश्यक देरी जानबुझ कर की जा रही है। वर्ष 2008, 2010 एवं समय समय पर समानुपातीकरण का काम किया जा चुका है, हालांकि इसे बहाली के बाद भी किया जा सकता है। क्योंकि प्रारंभिक विद्यालयों में रिक्तियाँ पर्याप्त संख्या में है। सरकार की दोहरी नीति की वजह से हजारों टीईटी अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। नाराज अभ्यर्थियों ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आर के महाजन पर भी अपना गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा कि हाईस्कूलों के साथ ही प्रारंभिक विद्यालयों में भी यदि बहाली प्रक्रिया अविलम्ब प्रारंभ नहीं की गई तो सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुये 10 जून से पटना गर्दनीबाग में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने टीईटी अभ्यर्थियों से इस आंदोलन को सफल बनाने का अहवान भी किया। मौके पर जवाहर कुमार, अजय कुमार, मुरारी कुमार, नवीन कुमार, पवन कुमार, सौरभ कुमार, जितेन्द्र कुमार, , सुजीत द्विवेदी, सोनू शर्मा सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी उपस्थित रहे।
सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया से ब्यूरो रिपोर्ट:-
बिहार टीईटी सीटीईटी उत्तीर्ण शिक्षक बहाली मोर्चा की बैठक गुरूवार को एम जे के कॉलेज परिसर मे प्रदेश सहसंयोजक सोनू कुमार सोनी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में उपस्थित अभ्यर्थियों नें सरकार पर शिक्षा विरोधी नीति का आरोप लगाते हुये कहा कि राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों के 02 लाख से अधिक पद वर्षों से रिक्त पड़े है। इधर टीईटी की परीक्षा उत्तीर्ण होने के बावजूद शिक्षक बहाली का इंतजार कर रहे है। कुछ अभ्यर्थियों के उम्र सीमा भी समाप्ति के कगार पर हैं। एक तरफ सरकार राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की दावा करती है। वहीं दूसरी तरफ 50 हजार की संख्या में टीईटी उत्तीर्ण प्रशिक्षित अभ्यर्थी दर-बदर भटक रहे है। फिर भी टालमटोल का सिलसिला अभी भी जारी है। पहले सरकार नियोजित शिक्षकों के सुप्रीम कोर्ट में चल रहे वेतन मामले का हवाला देकर बहाना करती रही, अब शिक्षकों के समानुपातीकरण के बाद बहाली करने की बात कही जा रही है। ऐसे में देखा जायें तो सरकार की मंशा साफ नहीं है समानुपातीकरण के आड़ में बहाली को बेवजह लटकाना चाह रही है।
उन्होंने बताया कि 01 जून 2019 को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक थी। उसमें निर्णय लिये गये कि हाईस्कूलों में जून माह से 32,000 हजार शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया प्रारंभ होगी, जिसमें एसटीईटी अभ्यर्थी पर्याप्त संख्या में मिल नहीं रहें है। वहीं प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों का समानुपातीकरण करने के बाद शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया प्रारंभ होने की बात की जा रही हेै जहाँ हजारों टीईटी अभ्यर्थी बेरोजगार पड़े है। इस तरह दोहरी नीति की वजह से सभी अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित एवं परेशान है। समान काम-समान वेतन का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने का हवाला देकर शिक्षामंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं अन्य द्वारा डेढ़ साल से आश्वासन दिया जा रहा कि फैसला आने के 10 दिन के भीतर बहाली प्रक्रिया प्रारंभ हो जायेगी, जो की आ चुका है। अब शिक्षकों के समानुपातीकरण के नाम पर बहाली में अनावश्यक देरी जानबुझ कर की जा रही है। वर्ष 2008, 2010 एवं समय समय पर समानुपातीकरण का काम किया जा चुका है, हालांकि इसे बहाली के बाद भी किया जा सकता है। क्योंकि प्रारंभिक विद्यालयों में रिक्तियाँ पर्याप्त संख्या में है। सरकार की दोहरी नीति की वजह से हजारों टीईटी अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। नाराज अभ्यर्थियों ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आर के महाजन पर भी अपना गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा कि हाईस्कूलों के साथ ही प्रारंभिक विद्यालयों में भी यदि बहाली प्रक्रिया अविलम्ब प्रारंभ नहीं की गई तो सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुये 10 जून से पटना गर्दनीबाग में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने टीईटी अभ्यर्थियों से इस आंदोलन को सफल बनाने का अहवान भी किया। मौके पर जवाहर कुमार, अजय कुमार, मुरारी कुमार, नवीन कुमार, पवन कुमार, सौरभ कुमार, जितेन्द्र कुमार, , सुजीत द्विवेदी, सोनू शर्मा सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी उपस्थित रहे।
बिहार टीईटी सीटीईटी उत्तीर्ण शिक्षक बहाली मोर्चा की बैठक गुरूवार को एम जे के कॉलेज परिसर मे प्रदेश सहसंयोजक सोनू कुमार सोनी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में उपस्थित अभ्यर्थियों नें सरकार पर शिक्षा विरोधी नीति का आरोप लगाते हुये कहा कि राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों के 02 लाख से अधिक पद वर्षों से रिक्त पड़े है। इधर टीईटी की परीक्षा उत्तीर्ण होने के बावजूद शिक्षक बहाली का इंतजार कर रहे है। कुछ अभ्यर्थियों के उम्र सीमा भी समाप्ति के कगार पर हैं। एक तरफ सरकार राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की दावा करती है। वहीं दूसरी तरफ 50 हजार की संख्या में टीईटी उत्तीर्ण प्रशिक्षित अभ्यर्थी दर-बदर भटक रहे है। फिर भी टालमटोल का सिलसिला अभी भी जारी है। पहले सरकार नियोजित शिक्षकों के सुप्रीम कोर्ट में चल रहे वेतन मामले का हवाला देकर बहाना करती रही, अब शिक्षकों के समानुपातीकरण के बाद बहाली करने की बात कही जा रही है। ऐसे में देखा जायें तो सरकार की मंशा साफ नहीं है समानुपातीकरण के आड़ में बहाली को बेवजह लटकाना चाह रही है।
उन्होंने बताया कि 01 जून 2019 को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक थी। उसमें निर्णय लिये गये कि हाईस्कूलों में जून माह से 32,000 हजार शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया प्रारंभ होगी, जिसमें एसटीईटी अभ्यर्थी पर्याप्त संख्या में मिल नहीं रहें है। वहीं प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों का समानुपातीकरण करने के बाद शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया प्रारंभ होने की बात की जा रही हेै जहाँ हजारों टीईटी अभ्यर्थी बेरोजगार पड़े है। इस तरह दोहरी नीति की वजह से सभी अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित एवं परेशान है। समान काम-समान वेतन का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने का हवाला देकर शिक्षामंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं अन्य द्वारा डेढ़ साल से आश्वासन दिया जा रहा कि फैसला आने के 10 दिन के भीतर बहाली प्रक्रिया प्रारंभ हो जायेगी, जो की आ चुका है। अब शिक्षकों के समानुपातीकरण के नाम पर बहाली में अनावश्यक देरी जानबुझ कर की जा रही है। वर्ष 2008, 2010 एवं समय समय पर समानुपातीकरण का काम किया जा चुका है, हालांकि इसे बहाली के बाद भी किया जा सकता है। क्योंकि प्रारंभिक विद्यालयों में रिक्तियाँ पर्याप्त संख्या में है। सरकार की दोहरी नीति की वजह से हजारों टीईटी अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। नाराज अभ्यर्थियों ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आर के महाजन पर भी अपना गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा कि हाईस्कूलों के साथ ही प्रारंभिक विद्यालयों में भी यदि बहाली प्रक्रिया अविलम्ब प्रारंभ नहीं की गई तो सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुये 10 जून से पटना गर्दनीबाग में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने टीईटी अभ्यर्थियों से इस आंदोलन को सफल बनाने का अहवान भी किया। मौके पर जवाहर कुमार, अजय कुमार, मुरारी कुमार, नवीन कुमार, पवन कुमार, सौरभ कुमार, जितेन्द्र कुमार, , सुजीत द्विवेदी, सोनू शर्मा सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी उपस्थित रहे।
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