पश्चिम चंपारण जिला के चुहडी उप डाकघर में 1800000 रुपए का कथित घोटाला का मामला प्रकाश में आया है जानकार विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीबीएस होने के उपरांत उप डाकघर चूड़ी में कार्यरत तत्कालीन डाकपाल विजय कुमार मिश्र कंप्यूटर संचालन में दक्ष नहीं थे जिसके कारण उन्होंने 300 रुपैया प्रतिदिन के हिसाब से एक कंप्यूटर संचालक को रखकर कार्य कराते थे लेकिन उक्त कंप्यूटर संचालक कंप्यूटर के संचालन के क्रम में तत्कालीन डाकपाल के पासवर्ड तथा यूजर आईडी का इस्तेमाल करता था जो विभागीय नियमानुसार वैध नहीं है इसी कड़ी में वर्ष 2016 में एक बचत खाता मी ₹2050 की जगह ₹2000050 रुपया जमा दिखाकर 18 लाख रुपया की निकासी अलग-अलग तिथियों में कर ली दुखद बात तो यह है की सभी उप डाकघरों सहित प्रधान डाकघर बेतिया के तमाम लेनदेन के नियंत्रण के लिए एसबीसी ओ का कार्यालय है लेकिन न जाने किस कारण से इन लोगों ने उस पर ध्यान नहीं दिया हालाकी बाद में इसकी भनक लगते हैं विभाग के स्थानीय वरीय अधिकारियों द्वारा जांच की प्रक्रिया शुरू की गई जिसमें यह मामला उजागर हुआ बताते चलें कि इसके पूर्व प्रधान डाकघर बेतिया में ₹500000 के किसान विकास पत्र किसान का गलत तरीके भुगतान 90 से 2000 के दशक में हो चुका है 2004 के आसपास नया टोला कुंडा घर में लगभग 12.5 लाख नरकटियागंज में मनरेगा में 1200000 से अधिक का घोटाला उजागर होने के बाद भी डाक विभाग के वरीय अधिकारियों द्वारा मामले की लीपापोती अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति हेतु कर दी गई इधर सीबीएस होने के बाद आधे दर्जन उप डाकघरों को छोड़कर अन्य सभी डाक घर सीएसई भी हुए इसके बावजूद कई उप डाकघर ने भाड़े के कंप्यूटर संचालक को रखकर संबंधित उप डाकघर के डाकपाल अपने पासवर्ड एवं यूजर आईडी से जुगाड़ टेक्नोलॉजी के तहत किसी तरह अपने डाकघर का संचालन कर रहे हैं इसकी जानकारी विभाग के स्थानीय वरीय अधिकारियों को भी है इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है ऐसे में डाकघरों में भी आने वाले दिनों में घोटाले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता
सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया से ब्यूरो सोनुभारतद्वाज रिपोर्ट:-
पश्चिम चंपारण जिला के चुहडी उप डाकघर में 1800000 रुपए का कथित घोटाला का मामला प्रकाश में आया है जानकार विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीबीएस होने के उपरांत उप डाकघर चूड़ी में कार्यरत तत्कालीन डाकपाल विजय कुमार मिश्र कंप्यूटर संचालन में दक्ष नहीं थे जिसके कारण उन्होंने 300 रुपैया प्रतिदिन के हिसाब से एक कंप्यूटर संचालक को रखकर कार्य कराते थे लेकिन उक्त कंप्यूटर संचालक कंप्यूटर के संचालन के क्रम में तत्कालीन डाकपाल के पासवर्ड तथा यूजर आईडी का इस्तेमाल करता था जो विभागीय नियमानुसार वैध नहीं है इसी कड़ी में वर्ष 2016 में एक बचत खाता मी ₹2050 की जगह ₹2000050 रुपया जमा दिखाकर 18 लाख रुपया की निकासी अलग-अलग तिथियों में कर ली दुखद बात तो यह है की सभी उप डाकघरों सहित प्रधान डाकघर बेतिया के तमाम लेनदेन के नियंत्रण के लिए एसबीसी ओ का कार्यालय है लेकिन न जाने किस कारण से इन लोगों ने उस पर ध्यान नहीं दिया हालाकी बाद में इसकी भनक लगते हैं विभाग के स्थानीय वरीय अधिकारियों द्वारा जांच की प्रक्रिया शुरू की गई जिसमें यह मामला उजागर हुआ बताते चलें कि इसके पूर्व प्रधान डाकघर बेतिया में ₹500000 के किसान विकास पत्र किसान का गलत तरीके भुगतान 90 से 2000 के दशक में हो चुका है 2004 के आसपास नया टोला कुंडा घर में लगभग 12.5 लाख नरकटियागंज में मनरेगा में 1200000 से अधिक का घोटाला उजागर होने के बाद भी डाक विभाग के वरीय अधिकारियों द्वारा मामले की लीपापोती अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति हेतु कर दी गई इधर सीबीएस होने के बाद आधे दर्जन उप डाकघरों को छोड़कर अन्य सभी डाक घर सीएसई भी हुए इसके बावजूद कई उप डाकघर ने भाड़े के कंप्यूटर संचालक को रखकर संबंधित उप डाकघर के डाकपाल अपने पासवर्ड एवं यूजर आईडी से जुगाड़ टेक्नोलॉजी के तहत किसी तरह अपने डाकघर का संचालन कर रहे हैं इसकी जानकारी विभाग के स्थानीय वरीय अधिकारियों को भी है इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है ऐसे में डाकघरों में भी आने वाले दिनों में घोटाले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता
पश्चिम चंपारण जिला के चुहडी उप डाकघर में 1800000 रुपए का कथित घोटाला का मामला प्रकाश में आया है जानकार विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीबीएस होने के उपरांत उप डाकघर चूड़ी में कार्यरत तत्कालीन डाकपाल विजय कुमार मिश्र कंप्यूटर संचालन में दक्ष नहीं थे जिसके कारण उन्होंने 300 रुपैया प्रतिदिन के हिसाब से एक कंप्यूटर संचालक को रखकर कार्य कराते थे लेकिन उक्त कंप्यूटर संचालक कंप्यूटर के संचालन के क्रम में तत्कालीन डाकपाल के पासवर्ड तथा यूजर आईडी का इस्तेमाल करता था जो विभागीय नियमानुसार वैध नहीं है इसी कड़ी में वर्ष 2016 में एक बचत खाता मी ₹2050 की जगह ₹2000050 रुपया जमा दिखाकर 18 लाख रुपया की निकासी अलग-अलग तिथियों में कर ली दुखद बात तो यह है की सभी उप डाकघरों सहित प्रधान डाकघर बेतिया के तमाम लेनदेन के नियंत्रण के लिए एसबीसी ओ का कार्यालय है लेकिन न जाने किस कारण से इन लोगों ने उस पर ध्यान नहीं दिया हालाकी बाद में इसकी भनक लगते हैं विभाग के स्थानीय वरीय अधिकारियों द्वारा जांच की प्रक्रिया शुरू की गई जिसमें यह मामला उजागर हुआ बताते चलें कि इसके पूर्व प्रधान डाकघर बेतिया में ₹500000 के किसान विकास पत्र किसान का गलत तरीके भुगतान 90 से 2000 के दशक में हो चुका है 2004 के आसपास नया टोला कुंडा घर में लगभग 12.5 लाख नरकटियागंज में मनरेगा में 1200000 से अधिक का घोटाला उजागर होने के बाद भी डाक विभाग के वरीय अधिकारियों द्वारा मामले की लीपापोती अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति हेतु कर दी गई इधर सीबीएस होने के बाद आधे दर्जन उप डाकघरों को छोड़कर अन्य सभी डाक घर सीएसई भी हुए इसके बावजूद कई उप डाकघर ने भाड़े के कंप्यूटर संचालक को रखकर संबंधित उप डाकघर के डाकपाल अपने पासवर्ड एवं यूजर आईडी से जुगाड़ टेक्नोलॉजी के तहत किसी तरह अपने डाकघर का संचालन कर रहे हैं इसकी जानकारी विभाग के स्थानीय वरीय अधिकारियों को भी है इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है ऐसे में डाकघरों में भी आने वाले दिनों में घोटाले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता
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