बिहार में प्राथमिक स्तर की शिक्षा व्यवस्था अधर में लटका एवं नौनिहाल के भविष्य से हो रहा खिलवाड़ ।
पिन्टू कुमार की रिपोर्ट-
बिहार में प्राथमिक स्तर की शिक्षा व्यवस्था इतनी गिर गई है। कि हम अपने समाज में आने वाले पीढ़ी के को क्या जवाब देंगे। आज हमारे राज्य सरकार में केवल राजनीति में कुर्सी का किस्सा देखने को मिल रहा है ।जो हमारे समाज के लिए खराब संदेश दिखाई देता हुआ नजर आ रहा है ।बाल पांव में गरीबी की झलक, झूले और प्लास्टिक में समय बस्ते को लेकर कंधे पर लटकाए स्कूल की वर्दी में भागते हुए, बालक दुनिया की खबरों से पूरी तरह बेखबर रहते हैं ।आज हमारे देश में आधे से अधिक नौनिहाल गांव में निवास करते हैं। आज के दौर में गांव के गरीब माता पिता अपने बच्चों के भविष्य संवारने में जुटे हैं । उनकी आर्थिक स्थिति इतनी सुदृढ़ नहीं है कि वह अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजें ,लेकिन आर्थिक स्थिति की वजह से वह अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने के लिए मजबूर हैं ।लेकिन सवाल उठना यह लाजमी है ।कि यदि इनके स्थान पर निजी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों में स्कूल का माहौल कैसा होता है। उनके स्कूल एवं भावनाओं में गजब की चमक होती है ।उनके चेहरे एवं व्यवहार में चकित करने वाला तेज एवं संस्कार होता है ।विदेश में होने वाले तकनीकी और अन्य परिवर्तनों से पूरी तरह परिचित होते हैं ।लेकिन सामाजिक दृष्टिकोण से यह नजर आ रहा है। कि सरकारी विद्यालय में सरकारी सुविधाएं मिलने के बाद सरकारी स्कूल के नन्हे-मुन्ने बच्चों को इन सब चीजों से क्यों अनभिज्ञ है। आखिरकार उसके चेहरे पर या क्यों नहीं लगता है। कि उन्हें जीवन यापन करने लायक भी शिक्षा नहीं दी जा रही ,क्या सरकार के अधीन काम करने वाले अधिकारी गण अपने खुद के बच्चों के लिए सरकारी स्तर की शिक्षा व्यवस्था क्यों नहीं चाहते ,यदि नहीं तो फिर क्यों देश के गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उनके गुणात्मक शिक्षा क्यों नहीं मुहैया कराया जा रहा है। उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता है ।आज हमारे देश की राजनीति का अखाड़ा बन गया है कोई भी नेता इस शिक्षा के प्रभाव से अछूता नहीं है ।लेकिन इस पर कोई भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं करता है। यहाँ हमारे देश मे परिवारवाद से लेकर राजनीतिकवाद सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। यहाँ हमारे राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार तक में प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक कोई भी रूल नियम नही है यहाँ तक समय से रिजल्ट भी नही आता है।
पिन्टू कुमार की रिपोर्ट-
बिहार में प्राथमिक स्तर की शिक्षा व्यवस्था इतनी गिर गई है। कि हम अपने समाज में आने वाले पीढ़ी के को क्या जवाब देंगे। आज हमारे राज्य सरकार में केवल राजनीति में कुर्सी का किस्सा देखने को मिल रहा है ।जो हमारे समाज के लिए खराब संदेश दिखाई देता हुआ नजर आ रहा है ।बाल पांव में गरीबी की झलक, झूले और प्लास्टिक में समय बस्ते को लेकर कंधे पर लटकाए स्कूल की वर्दी में भागते हुए, बालक दुनिया की खबरों से पूरी तरह बेखबर रहते हैं ।आज हमारे देश में आधे से अधिक नौनिहाल गांव में निवास करते हैं। आज के दौर में गांव के गरीब माता पिता अपने बच्चों के भविष्य संवारने में जुटे हैं । उनकी आर्थिक स्थिति इतनी सुदृढ़ नहीं है कि वह अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजें ,लेकिन आर्थिक स्थिति की वजह से वह अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने के लिए मजबूर हैं ।लेकिन सवाल उठना यह लाजमी है ।कि यदि इनके स्थान पर निजी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों में स्कूल का माहौल कैसा होता है। उनके स्कूल एवं भावनाओं में गजब की चमक होती है ।उनके चेहरे एवं व्यवहार में चकित करने वाला तेज एवं संस्कार होता है ।विदेश में होने वाले तकनीकी और अन्य परिवर्तनों से पूरी तरह परिचित होते हैं ।लेकिन सामाजिक दृष्टिकोण से यह नजर आ रहा है। कि सरकारी विद्यालय में सरकारी सुविधाएं मिलने के बाद सरकारी स्कूल के नन्हे-मुन्ने बच्चों को इन सब चीजों से क्यों अनभिज्ञ है। आखिरकार उसके चेहरे पर या क्यों नहीं लगता है। कि उन्हें जीवन यापन करने लायक भी शिक्षा नहीं दी जा रही ,क्या सरकार के अधीन काम करने वाले अधिकारी गण अपने खुद के बच्चों के लिए सरकारी स्तर की शिक्षा व्यवस्था क्यों नहीं चाहते ,यदि नहीं तो फिर क्यों देश के गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उनके गुणात्मक शिक्षा क्यों नहीं मुहैया कराया जा रहा है। उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता है ।आज हमारे देश की राजनीति का अखाड़ा बन गया है कोई भी नेता इस शिक्षा के प्रभाव से अछूता नहीं है ।लेकिन इस पर कोई भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं करता है। यहाँ हमारे देश मे परिवारवाद से लेकर राजनीतिकवाद सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। यहाँ हमारे राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार तक में प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक कोई भी रूल नियम नही है यहाँ तक समय से रिजल्ट भी नही आता है।



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