सिकटा---बलथर प्रखंड मुख्यालय को जिला से जोडने वाली सडक मरम्मत में डीएम के हस्तक्षेप के बाद सुधार नही। पुनः मरम्मत के साथ ही उखडने लगा है। फर्क सिर्फ इतना है कि धूल से थोडी राहत मिली है। पर इस सडक पर पैदल चलना मानो सुईयां पहाड पर चलने से कम नही हे। सडक पर बने गढ्ढों को पाटकर गढ्ढों की संख्या कम जरूर की गई है। गढ्ढों में पत्थर डालकर किया गया कालीकरण मरम्मत के साथ ही उखडने लगा है। इसके पहले अगस्त 2017 के पहले बलथर सिकटा मुख्य सडक का मरम्मत किया गया था। वह मरम्मत अनियमितता का भेंट चढ गया। संयोग था कि मरम्मत के बाद प्रलयकारी बाढ आया। बाढ के बहाने सडक क्षतिग्रस्त होने की बात बनाकर संवेदक पार हो गये। वास्विकता यह था कि सडक पर पानी भौंरा से सिकटा तक ही चढा था।भौंरा त्रिवेणी नहर से बलथर तक सडक पर बाढ का पानी नही था। बावजूद यहां की सडके क्यों टुट गये। इसके बाद भी इसे लेकर कई बार पटना से आयी विजीलेंस टीम जांच भी की। पुनः सडक मरम्मत कराने की बात कहा गया था। लेकिन वह जूबानी आदेशबन कर रह गया। उसी टुटी सडक पर लोग चलते रहे। सडक की हालत काफी दयनीय हो गई थी। सांसद से लेकर विधायक समेत जिला के अधिकारी इसी रास्ते आते रहे पर किसी ने सुध नही लिया। इधर डीएम डा निलेश रामचन्द्र देवडे सीमा सडक की मुआयना करने पहुंचे। इस सडक हालत देख इसके कार्यपालक अभियंता समेत संवेदक को जमकर डा़ट पिलाया। अविलंब मरम्मत करने का सख्त निर्देश दिया। इस आलोक में आननफानन में सडक पर बने गढ्ढों को पाटकर काली करण कर दिया गया। इस मरम्मत का गुणवत्ता इतना है कि सडक मरम्मत होते ही सडक उखडने लगा है। कालीकरण की पत्थरीली छर्री पैदल चलने वालो के पैरों को जख्मी कर रहे है। इसका सुधी लेने वाले कोई नही है।
सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया/सिकटा संवाद सूत्र:-
सिकटा---बलथर प्रखंड मुख्यालय को जिला से जोडने वाली सडक मरम्मत में डीएम के हस्तक्षेप के बाद सुधार नही। पुनः मरम्मत के साथ ही उखडने लगा है। फर्क सिर्फ इतना है कि धूल से थोडी राहत मिली है। पर इस सडक पर पैदल चलना मानो सुईयां पहाड पर चलने से कम नही हे। सडक पर बने गढ्ढों को पाटकर गढ्ढों की संख्या कम जरूर की गई है। गढ्ढों में पत्थर डालकर किया गया कालीकरण मरम्मत के साथ ही उखडने लगा है। इसके पहले अगस्त 2017 के पहले बलथर सिकटा मुख्य सडक का मरम्मत किया गया था। वह मरम्मत अनियमितता का भेंट चढ गया। संयोग था कि मरम्मत के बाद प्रलयकारी बाढ आया। बाढ के बहाने सडक क्षतिग्रस्त होने की बात बनाकर संवेदक पार हो गये। वास्विकता यह था कि सडक पर पानी भौंरा से सिकटा तक ही चढा था।भौंरा त्रिवेणी नहर से बलथर तक सडक पर बाढ का पानी नही था। बावजूद यहां की सडके क्यों टुट गये। इसके बाद भी इसे लेकर कई बार पटना से आयी विजीलेंस टीम जांच भी की। पुनः सडक मरम्मत कराने की बात कहा गया था। लेकिन वह जूबानी आदेशबन कर रह गया। उसी टुटी सडक पर लोग चलते रहे। सडक की हालत काफी दयनीय हो गई थी। सांसद से लेकर विधायक समेत जिला के अधिकारी इसी रास्ते आते रहे पर किसी ने सुध नही लिया। इधर डीएम डा निलेश रामचन्द्र देवडे सीमा सडक की मुआयना करने पहुंचे। इस सडक हालत देख इसके कार्यपालक अभियंता समेत संवेदक को जमकर डा़ट पिलाया। अविलंब मरम्मत करने का सख्त निर्देश दिया। इस आलोक में आननफानन में सडक पर बने गढ्ढों को पाटकर काली करण कर दिया गया। इस मरम्मत का गुणवत्ता इतना है कि सडक मरम्मत होते ही सडक उखडने लगा है। कालीकरण की पत्थरीली छर्री पैदल चलने वालो के पैरों को जख्मी कर रहे है। इसका सुधी लेने वाले कोई नही है।
सिकटा---बलथर प्रखंड मुख्यालय को जिला से जोडने वाली सडक मरम्मत में डीएम के हस्तक्षेप के बाद सुधार नही। पुनः मरम्मत के साथ ही उखडने लगा है। फर्क सिर्फ इतना है कि धूल से थोडी राहत मिली है। पर इस सडक पर पैदल चलना मानो सुईयां पहाड पर चलने से कम नही हे। सडक पर बने गढ्ढों को पाटकर गढ्ढों की संख्या कम जरूर की गई है। गढ्ढों में पत्थर डालकर किया गया कालीकरण मरम्मत के साथ ही उखडने लगा है। इसके पहले अगस्त 2017 के पहले बलथर सिकटा मुख्य सडक का मरम्मत किया गया था। वह मरम्मत अनियमितता का भेंट चढ गया। संयोग था कि मरम्मत के बाद प्रलयकारी बाढ आया। बाढ के बहाने सडक क्षतिग्रस्त होने की बात बनाकर संवेदक पार हो गये। वास्विकता यह था कि सडक पर पानी भौंरा से सिकटा तक ही चढा था।भौंरा त्रिवेणी नहर से बलथर तक सडक पर बाढ का पानी नही था। बावजूद यहां की सडके क्यों टुट गये। इसके बाद भी इसे लेकर कई बार पटना से आयी विजीलेंस टीम जांच भी की। पुनः सडक मरम्मत कराने की बात कहा गया था। लेकिन वह जूबानी आदेशबन कर रह गया। उसी टुटी सडक पर लोग चलते रहे। सडक की हालत काफी दयनीय हो गई थी। सांसद से लेकर विधायक समेत जिला के अधिकारी इसी रास्ते आते रहे पर किसी ने सुध नही लिया। इधर डीएम डा निलेश रामचन्द्र देवडे सीमा सडक की मुआयना करने पहुंचे। इस सडक हालत देख इसके कार्यपालक अभियंता समेत संवेदक को जमकर डा़ट पिलाया। अविलंब मरम्मत करने का सख्त निर्देश दिया। इस आलोक में आननफानन में सडक पर बने गढ्ढों को पाटकर काली करण कर दिया गया। इस मरम्मत का गुणवत्ता इतना है कि सडक मरम्मत होते ही सडक उखडने लगा है। कालीकरण की पत्थरीली छर्री पैदल चलने वालो के पैरों को जख्मी कर रहे है। इसका सुधी लेने वाले कोई नही है।
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