मानसून की आहट पाते ही किसान धान की रोपाई में जुट गये है। जिन किसानों ने समय से संसाधनों के सहारे समय से धान का बीज गिराया था । उन्होंने अपना रोपाई शुरू कर दिया है । बताते चलें कि जुलाई के प्रथम सप्ताह में मानसून आने का आकलन लगाया जा रहा है। यदि ऐसा हुआ तो किसानों को अच्छा लाभ मिलेगा और अच्छा उत्पादन होगा। वही समय से धान की रोपाई पर फसल तैयार होने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। इसके साथ ही जैसे ही मौसम होगा वह बारिश होगी तो पौधे बढ़वार की ओर अग्रसर होंगे। इससे पैदावार अच्छी होगी लोकगीतों के साथ धान की रोपाई के दौरान महिलाएं पारंपरिक लोकगीत की शानदार प्रस्तुति देकर कार्य में जुटी रहती हैं। महिलाओं ने सामूहिक रोपाई में भाग लिया और पारंपरिक लोकगीत गाकर उत्साह जगाया। मजे की बात यह है कि मिट्टी से लथपथ पौधरोपण से पहले लोक गीतों का गायन करते हैं और पौधारोपण के समय भी सामूहिक रूप से महिलाएं गाना गाती है। या दृश्य हर किसी को अद्भुत कर देता है अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में सामूहिक कृषि कार्य करने की परंपरा जीवंत है । एक दूसरे से सभी मिलकर खेतों में कार्य करते हैं।
सरस् संगम(कार्यलय)बेतिया/मझौलिया संवाददाता
मानसून की आहट पाते ही किसान धान की रोपाई में जुट गये है। जिन किसानों ने समय से संसाधनों के सहारे समय से धान का बीज गिराया था । उन्होंने अपना रोपाई शुरू कर दिया है । बताते चलें कि जुलाई के प्रथम सप्ताह में मानसून आने का आकलन लगाया जा रहा है। यदि ऐसा हुआ तो किसानों को अच्छा लाभ मिलेगा और अच्छा उत्पादन होगा। वही समय से धान की रोपाई पर फसल तैयार होने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। इसके साथ ही जैसे ही मौसम होगा वह बारिश होगी तो पौधे बढ़वार की ओर अग्रसर होंगे। इससे पैदावार अच्छी होगी लोकगीतों के साथ धान की रोपाई के दौरान महिलाएं पारंपरिक लोकगीत की शानदार प्रस्तुति देकर कार्य में जुटी रहती हैं। महिलाओं ने सामूहिक रोपाई में भाग लिया और पारंपरिक लोकगीत गाकर उत्साह जगाया। मजे की बात यह है कि मिट्टी से लथपथ पौधरोपण से पहले लोक गीतों का गायन करते हैं और पौधारोपण के समय भी सामूहिक रूप से महिलाएं गाना गाती है। या दृश्य हर किसी को अद्भुत कर देता है अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में सामूहिक कृषि कार्य करने की परंपरा जीवंत है । एक दूसरे से सभी मिलकर खेतों में कार्य करते हैं।
मानसून की आहट पाते ही किसान धान की रोपाई में जुट गये है। जिन किसानों ने समय से संसाधनों के सहारे समय से धान का बीज गिराया था । उन्होंने अपना रोपाई शुरू कर दिया है । बताते चलें कि जुलाई के प्रथम सप्ताह में मानसून आने का आकलन लगाया जा रहा है। यदि ऐसा हुआ तो किसानों को अच्छा लाभ मिलेगा और अच्छा उत्पादन होगा। वही समय से धान की रोपाई पर फसल तैयार होने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। इसके साथ ही जैसे ही मौसम होगा वह बारिश होगी तो पौधे बढ़वार की ओर अग्रसर होंगे। इससे पैदावार अच्छी होगी लोकगीतों के साथ धान की रोपाई के दौरान महिलाएं पारंपरिक लोकगीत की शानदार प्रस्तुति देकर कार्य में जुटी रहती हैं। महिलाओं ने सामूहिक रोपाई में भाग लिया और पारंपरिक लोकगीत गाकर उत्साह जगाया। मजे की बात यह है कि मिट्टी से लथपथ पौधरोपण से पहले लोक गीतों का गायन करते हैं और पौधारोपण के समय भी सामूहिक रूप से महिलाएं गाना गाती है। या दृश्य हर किसी को अद्भुत कर देता है अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में सामूहिक कृषि कार्य करने की परंपरा जीवंत है । एक दूसरे से सभी मिलकर खेतों में कार्य करते हैं।
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